दोस्ती में हम दोनों ही कमाल कर रहे थे,
मैं उसे, वो मुझे, बस इस्तेमाल कर रहे थे
dostee mein ham donon hee kamaal kar rahe the
main use, vo mujhe, bas istemaal kar rahe the.
ये दोस्ती ये ज़िन्दगी एक सर्कस है साहब,
यहाँ मतलब के करतब देखने को मिलते है
ye dostee ye zindagee ek sarkas hai saahab,
yahaan matalab ke karatab dekhane ko milate hai.
मैं दोस्त पर आंख बंद करके भरोसा किया,
उसने वक्त नहीं लगाया आंख खोल देने में
main dost par aankh band karake bharosa kiya,
usane vakt nahin lagaaya aankh khol dene mein.
किसी ने कहा दोस्ती कब तक चलती है,
मैंने कहा बस मतलब तक ही चलती है
kisee ne kaha dostee kab tak chalatee hai,
mainne kaha bas matalab tak hee chalatee hai.
जिस पर भरोसा किया वही दर्द दे गया,
मतलबी दोस्त था पीठ में खंजर दे गया
jis par bharosa kiya vahee dard de gaya,
matalabee dost tha peeth mein khanjar de gaya.
तेरे मतलब की दुनिया में सच्चाई कहाँ,
हर बात में छुपी थी तेरे इरादों की दास्तां।
तेरे झूठे वादों से दिल भर गया,
अब किसी और पर भरोसा करना मुश्किल हो गया।
तूने दोस्ती का नाम लिया था मतलब से,
अब दूर जा रहे हैं हम तेरे हर छलावे से।
दोस्त ढूंढ़ने हैं तो सच्चे दोस्त ढूंढो,
मतलबी दोस्त तो तुम्हे अपने आप ही ढून्ढ लेते हैं।
असली लोग कभी नकली नहीं होते,
और नकली लोग कभी असली नहीं होते।
हमने भी सीख लिया है,
लोगों से की कैसे रंग बदलना है।
जब इन्सान की जरुरत खत्म हो जाती है,
उनके बोलने का अंदाज बदल जाता है।
असली लोग कभी नकली नहीं होते,
और नकली लोग कभी असली नहीं होते।
बुरा वक़्त आया तो कमियां गिना रहे हैं,
मेरे दोस्त अब मुझे दोस्ती का मतलब समझा रहे हैं।
वक़्त के साथ लोग बदल रहे हैं,
अब तो दोस्त भी मतलबी हो रहे हैं।
मतलबी दोस्तों से सबक मिला,
हर मुस्कान के पीछे था धोखे का किला।
तेरे साथ की जरूरत नहीं, ये अब जान लिया,
तूने जो खेल खेला, दिल को भी मान लिया।
वाकिफ हैं हम दुनिया के रिवाजो से,
मतलब निकल जाये तो हर कोई भुला देता हैं।
पक्के रिश्ते तो बचपन में बनते थे,
अब तो लोग बात भीमतलब से करते हैं।
तेरी हंसी में छिपा था धोखा गहरा,
मतलबी दोस्त तू, हर पल निकला सुनहरा।
मतलबी दोस्तों का हाल ही अलग होता है,
दिल से दूर और मतलब से पास होते हैं।
बिना मतलब के इस दुनिया में,
कोई किसी का भला नहीं करता।
जैसी तुम हो वैसी ही दुनिया है,
मतलबी तुम हो मतलबी दुनिया है।
कुछ यूँ वो मतलबी करार हो गया,
जब उसे हर हसीं चेहरे से प्यार हो गया।
मेरी दुनिया का हर शख्स मतलबी ही निकला,
सिवाय एक आईने के जो वफादार निकला।
तेरे छलावे ने दोस्ती का मोल गिरा दिया,
अब कोई रिश्ता भी दिल से नहीं निभा पाया।
तेरी दोस्ती का क्या भरोसा, हर पल बदलती है,
मतलबी दुनिया में हर शख्स खुद से चलता है।
दिल को तुने बहुत गहरा जख्म दिया,
मतलबी दोस्त बनकर हर रिश्ता झूठा किया।
तेरी हंसी के पीछे छिपा था साजिश का खेल,
मतलबी दोस्ती ने दिल को कर दिया फेल।
जिसे अपना माना, उसने ही धोखा दिया,
मतलब निकाल कर, दोस्ती का फर्ज़ भुला दिया।
मेरी दोस्ती का उन्होंने मुझे अच्छा सिला दिया,
मेरे बुरे वक्त में हर किसी ने मुझे भुला दिया।
तेरे फरेबी अंदाज ने सब कुछ मिटा दिया,
अब तेरी दोस्ती का कोई मतलब नहीं रहा।
दुनिया का पहला उसूल है- जब तक काम है,
तब तक राम राम है, उसके बाद न दुआ न सलाम है।
ना दोस्ती मिली ना प्यार मिला,
हर मोड़ पर, एक मतलबी यार मिला।
झूठे मतलबी दोस्त और आपका साया,
आपके साथ तभी होते हैं जब सूर्या चमकता है।
दोस्त आपको इतना स्वार्थी होने से बचना चाहिए,
और दूसरों के बारे में भी सोचना चाहिए।
साफ़ साफ़ बोलने वाला दोस्त कड़वा जरूर हो सकता है,
पर कभी मतलबी नहीं हो सकता।
मतलबी दुनिया में हर रिश्ते का यही हाल है,
दोस्त भी अब मतलब से भरने वाला सवाल है।
तूने जो किया, वो कभी भूला नहीं जाएगा,
मतलबी दोस्त तू, अब दिल में नहीं आएगा।
इस दुनिया की एक ही रीत है,
जिससे मतलब उसी से प्रीत है।
तेरे चेहरे के पीछे छिपी थी चालाकी की छाया,
मतलबी दोस्त बनकर दिल को खूब तड़पाया।
दोस्ती के नाम पर बस धोखा मिला,
मतलबी दोस्ती ने दिल को जला दिया।
तेरी हरकतों ने रिश्तों का मोल घटा दिया,
अब दोस्ती पर भरोसा करना ही छोड़ दिया।
विश्वास करें भी तो किसपे,
अब तो दोस्त भी मतलबी होने लगे हैं।
सबसे बुरा तब लगता है जब,
मतलबी लोग आपके दिल में उतर जाते हैं।
ना रूठने का डर ना मनाने की कोशिश,
दिल से उतरे हुए दोस्तों से शिकायत कैसी।
मतलबी दोस्त, की पहचान तो आपके बुरे वक्त मैं होती है,
जब वो आपको आपकी गलतियां गिनवाने लग जाते हैं।
नाम की दोस्ती और काम से यारी,
मतलबी दोस्तों जैसी ये आदत नहीं हमारी।
जो अपने थे, वो ही पराए हो गए ,
मतलबी दुनिया के साए हो गए।
मतलबी दोस्तों से बस इतना ही रिश्ता रहा ,
जब जरूरत थी तभी नाम लिखा रहा।
दोस्ती का मतलब ही बदल दिया लोगों ने,
मतलब निकलते ही भुला दिया अपनों ने।
मतलबी दुनिया में कौन किसका होता है?
जब जरूरत खत्म, तो रिश्ता भी खोता है।
वक्त के साथ लोग भी बदल जाते हैं ,
मतलब निकलते ही पराए बन जाते हैं।
दोस्ती का मतलब अब रह गया है सिर्फ नाम ,
मतलब ना हो तो कोई नहीं करता सलाम।
विश्वास करें भी तो किसपे,
अब तो दोस्त भी मतलबी होने लगे हैं।
मतलबी लोगो की मीठी बातें ओह,
ये तो सिर्फ एक दिखावा है,
चाहे आप भी उन्हें आजमालो,
आपको भी धोखा मिलेगा ये मेरा दावा है।
जब तक पास पैसा है,
तब तक ही दोस्त पूछते हैं,हाल कैसा है।
असली लोग कभी नकली नहीं होते,
और नकली लोग कभी असली नहीं होते।
काम आए ना मुश्किल में कोई यहां,
मतलबी दोस्त हैं मतलबी यार हैं।
दोस्त ढूंढ़ने हैं तो सच्चे दोस्त ढूंढो,
मतलबी दोस्त तो तुम्हे अपने आप ही ढून्ढ लेते हैं।
दिलों मे मतलब और जुबान से प्यार करते है,
बहुत से लोग दुनिया मे यही कारोबार करते है।
वाकिफ हैं हम दुनिया के रिवाजो से,
मतलब निकल जाये तो हर कोई भुला देता हैं।
मेरी दुनिया का हर शख्स मतलबी निकला,
घर एक आईना था बस वही वफादार निकला।
आज के इस मतलबी युग में,
अकेला चलना सीख लो,
जरूरी नहीं जो आज तुम्हारे साथ है,
वो कल भी तुम्हारे साथ होगा।
पराये लोग वफादार नहीं तो क्या हुआ,
धोखेबाज लोग भी तो अपने ही होते है।
बुरा वक़्त आया तो कमियां गिना रहे हैं,
मेरे दोस्त अब मुझे दोस्ती का मतलब समझा रहे हैं।
दोस्ती का मेरी अच्छा सिला दिया उसने,
मुसीबत में मेरी मुझे भुला दिया उसने।
बुरे वक़्त का बस यही फायदा होता है,
के मतलबी दोस्त अपने आप दूर हो जाते हैं।
जिस दोस्त पर भरोसा किया
अगर वो ही धोखा देदे तो
सारी दुनिया मतलबी लगने लग जाती है।
इस दिल के हाथों होकर मजबूर मौका दे देते हैं,
दिल में रहने वाले दोस्त तभी तो धोखा देते हैं।
सबसे बुरा तब लगता है,
जब मतलबी लोग आपके दिल में उतर जाते हैं।
वक़्त के साथ लोग बदल रहे हैं,
अब तो दोस्त भी मतलबी हो रहे हैं।
मुझपर एक एहसान करना,
बेईमान दोस्त दूर ही रहना।
आपका बुरा वक़्त आने के बाद ही
पता चलता है के आपका सच्चा दोस्त कौन है।
जो साथ रहकर भी फरेब करे,
उस से बड़ा दुश्मन कोई और नहीं हो सकता।
जब भी याद आता है वो दोस्त मेरा,
तो दिल टूटने लगता है जैसे कोई गहरा घाव है।
Whenever I remember that friend of mine,
my heart starts to break as if there is a deep wound.
वादा किया था एक-दूसरे के साथ रहेंगे हमेशा,
किंतु उस दोस्त ने बिखर गए सारे रिश्ते एक पल में।
We had promised to remain together forever,
but that friend shattered all our bonds in a moment.
मेरे “शब्दों” को इतने ध्यान से मत पढ़ा करो दोस्तों,
कुछ याद रह गया तो मुझे भूल नहीं पाओगे।
mere “shabdon” ko itane dhyaan se mat padha karo doston,
kuchh yaad rah gaya to mujhe bhool nahin paoge.
ऐसा कौन आया है तेरी ज़िन्दगी में ऐ दोस्त,
जो तुझे मेरी याद का मौक़ा भी नहीं देता?
aisa kaun aaya hai teree zindagee mein ai dost,
jo tujhe meree yaad ka mauqa bhee nahin deta?
दोस्त था वो मेरा, जिनका साथ मुझे सबसे ज्यादा चाहिए था,
पर वही मुझसे नाराज हो गया और सब कुछ खत्म हो गया।
He was my friend, whose company I needed the most,
but he got offended with me and everything ended.
प्यार से बंधा था दोस्ती का रिश्ता हमारा,
कैसे टूटा कौन जाने, पर दर्द है ज़रूर यादों में भरा।
Our bond of friendship was tied with love,
how it broke, who knows,
but the memories are surely filled with pain.
गहरा था विश्वास हमारी दोस्ती पर,
पर दोस्त ने तोड़ दिया जब मेरा साथ छोड़ा।
Deep was my faith in our friendship,
but my friend broke it when he left my side.
Dost ban kar tu ne dil toda,
Matlabi dosti ka rang bhi feeka pada.
Matlabi doston ki duniya hai alag,
Chehre par muskan, andar se dag.
Jispe bharosa kiya, wahi tha matlabi,
Dosti ka farz, tu ne hi tha bhul diya.
Matlab ke rishton ka aakhir yeh anjaam,
Dosti ke naam pe diya sirf dhoka har dafa.
Dosti ke naam pe tu ne tha bas dhoka,
Matlabi dost nikla, dil ka toota khandar.
Dosti thi pyari, par tu ne diya zakhm gehra,
Matlabi tu nikla, bas chhupa hua andhera.
Har pal jo saath tha, ab bas dhoka lagta hai,
Matlabi dost ki dosti ka sach samajh aata hai.
Dosti ke naam pe tu ne khub faayda uthaya,
Matlabi dost ban kar bas apna kaam banaya.

Matlab se barhi teri dosti ki dor,
Har ek pal tu ne diya dil ko thokar.
Dost ban kar dil ko churaya,
Matlabi dosti ne har sapna tod diya.
Matlabi dosti ka har pal yaad rahega,
Tu ne diya jo zakhm, kabhi na bhulega.
Dosti ke naam par khela khatarnaak khel,
Matlabi doston ka ab sab sach aa gaya samajh.
Teri har baat thi sirf ek dhokha,
Matlabi dosti ne sirf dard diya khokha.
Matlabi doston ka khel hai purana,
Peeth pe chhura, aage se lagaye gaal par gana.
Dosti ki baaton mein chhupa tha dhokha,
Matlabi doston ne diya bas saath ka jhokha.
Teri har harkat mein tha bas apna fayda,
Matlabi dosti ne har rishte ko tor diya.
Dosti ke naam par chhupa itna bada chhal,
Matlabi doston ne diya zindagi mein jaal.
You walked away when I needed you most,
Selfish friends are like fading ghosts.
You smiled in front, stabbed behind,
Selfish friends like you are hard to find.
Selfish friends play their game so well,
They smile at you, but push you to hell.
Your selfish acts, now plain to see,
You used me up, then let me be.
Selfish friends wear a smiling face,
But deep inside, there’s no grace.
Selfish friends, they come and go,
But the pain they leave, forever will show.
You acted sweet, but your heart was cold,
Selfish friends always have stories untold.
Selfishness killed what we had,
Now your friendship only makes me sad.
Fake smiles and empty words,
Selfish friends are just like birds.
You took what you needed, then walked away,
Selfish friends, always a price to pay.
You smiled so wide, but deep inside,
Selfish friends, they always hide.
Selfish friends, they never last,
Their fake friendship fades so fast.
Selfish friends act like they care,
But when you need them, they’re never there.
You used me till you had your way,
Selfish friends, they never stay.
Selfishness wrapped in a smiling face,
Such friends are nothing but a disgrace.
You were a friend, or so I thought,
Your selfish ways, now leave me distraught.
Friends like you are hard to trust,
Selfish hearts filled with only lust.
Dosti ka matlab sirf faayda reh gaya,
Jab zaroorat khatam toh rishta bhi beh gaya.
Waqt ke saath rang badal lete hain log,
Matlab nikal jaaye toh pehchaan bhi bhool jaate hain.
Matlabi doston ki yahi hai kahani,
Kaam padne par bas yaad aaye hamari.
Jo kabhi apne the, aaj paraye ho gaye,
Matlab ki dosti mein, dil ke tukde ho gaye.
Yaar wahi jo dukh mein saath nibhaaye,
Matlabi toh sirf waqt pe kaam aaye.
Dost banane se pehle soch lena zara,
Matlabi log sirf apne matlab ka rakhte hai sahara.
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